{"product_id":"निर्मला-लेखक-प्रेमचंद","title":"निर्मला , लेखक : प्रेमचंद","description":"\u003cp\u003e\u003cstrong data-start=\"1546\" data-end=\"1557\"\u003eनिर्मला\u003c\/strong\u003e को प्रेमचन्द का पहला \u003cstrong data-start=\"1579\" data-end=\"1593\"\u003eयथार्थवादी\u003c\/strong\u003e (हकीकत को दिखाने वाला) और हिंदी का पहला \u003cstrong data-start=\"1634\" data-end=\"1658\"\u003eमनोवैज्ञानिक उपन्यास\u003c\/strong\u003e माना जाता है। इस उपन्यास में प्रेमचन्द ने अपने उपदेश देने वाले अंदाज़ को कम किया है, जिससे यह उपन्यास और भी कलात्मक और सुंदर बन गया है। \u003cstrong data-start=\"68\" data-end=\"79\"\u003eनिर्मला\u003c\/strong\u003e मुंशी प्रेमचन्द का बहुत प्रसिद्ध हिंदी उपन्यास है। इसे साल 1927 में प्रकाशित किया गया था। इस उपन्यास की कहानी उन्होंने 1926 में लिखनी शुरू की थी। इसकी कहानी दहेज प्रथा और उम्र में बहुत अंतर वाले विवाह (अनमेल विवाह) पर आधारित है। यह उपन्यास पहले 'चाँद' नाम की महिलाओं की पत्रिका में 1925 से 1926 तक हर महीने किस्तों में छपा था। \u003cstrong data-start=\"902\" data-end=\"913\"\u003eनिर्मला\u003c\/strong\u003e एक दुखद कहानी है, जो दहेज और अनमेल विवाह की बुराइयों को दिखाती है। इसके ज़रिए प्रेमचन्द ने दिखाया है कि भारत की मिडिल क्लास लड़कियों की स्थिति कैसी दयनीय (दुख भरी) थी। उपन्यास के अंत में निर्मला की मौत इस बुरी सामाजिक परंपरा को खत्म करने की एक बड़ी चेतावनी बन जाती है।\u003c\/p\u003e","brand":"Shabd Nirantar","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":41638963347531,"sku":"PC-NM-FB-001","price":250.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0625\/2996\/2059\/files\/Nirmala_Premchand.jpg?v=1762226134","url":"https:\/\/shabdnirantar.myshopify.com\/products\/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%96%e0%a4%95-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%82%e0%a4%a6","provider":"Shabd Nirantar : A World of Books","version":"1.0","type":"link"}